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'मलबे का मलिक -मोहन राकेश, , रचना सार- 'मलबे का मालिक' यह कहानी देश-विभाजन की त्रासदी के साथ-साथ विभाजन के साढ़े, सात वर्षो में आए मानसिक परिवर्तन को व्यक्ति करती है। यह कहानी धर्म, जाति, स्वार्थ, द्वेष और लालसा, से ऊपर उठकर मनुष्य को मानवता का उपदेश देती है।, , विभाजन के साढ़े सात वर्षों बाद मुसलमानों की एक टोली हॉकी मैच देखने के लिए लाहौर से, अमृतसर आती है, जिनमें वृद्ध गनी मियाँ भी एक थे। गनी मियाँ की इच्छा होती है कि विभाजन पूर्व अपने, उस मकान को देखें, जिसे विभाजन से पहले ही छोड़कर वह पाकिस्तान गया था। वहीं से उसे अपने, मकान की जजने की और बेटे चिराग , उसकी बीवी जुबेदा तथा दोनों लड़कियाँ किश्वर और सुल्ताना के, मारे जाने की खबर मिली थी। परंतु वह यह नहीं जानता था, कि जिस रकक््खे पहलवान पर उसका और, उसके बेटे का अटूट विश्वास था, उसी रकक््खे पहलवान ने विश्वासघात से चिराग और उसकी बीवी बच्चों, की हत्या की थी।, , वृद्ध गनी मियाँ अपने घर के मलबे को देख कर रोते हैं, साथ-ही-साथ रक््खे पहलवान पर, विश्वास जताते हुए उसके प्रति सहानुभूति भी व्यक्त करते हैं। मलबे पर अपनी जागीर समझने वाले रक्खे, पहलवान को आश्चर्य इस बात का होता है कि गनी मियाँ के मन में तो अपने घर के मलबे के प्रति जरा, भी मोह नहीं है। पहलवान का मन परिवर्तित हो जाता है, उसे अपने किए पर घृणा आने लगती है। गनी, मियाँ के इस कथन से कि, “जो हाना था, जो गया रक्खिआ ! उसे अब कोई लौटा थेडे ही सकता है!, खुदा नेक की नेकी बनाए रखें और बद की बदी माफ करें!” यह इस बात का संकेत देता है कि मनुष्य, कुछ भी करे दुनिया में उसे अपने कर्मों का फल मिलता ही है। कहानी के अंत में रक्खे पहलवान को कुत्ता, मानो उसकी चेतना बनकर उसे उस मलबे से हटा देता है, जिसे लालसा और स्वार्थवश वह अपनी जागीर, समझता था। यह मोहभंग की कहानी है, जिसमें एक ओर गनी मियाँ का मोहभंग होता है, तो दूसरी ओर, रक््खे पहलवान का।, , , , ०७ प्रश्न, , 1. मोहन राकेश का जन्म कब हुआ ? 8 जनवरी, 1925, , 2. मोहन राकेश का जन्म कहाँ पर हुआ ? अमृतसर (पंजाब), , 3. मोहन राकेश का वास्तविक नाम क्या है ? मदन मोहन गुगलानी, , 4. मोहन राकेश के पिता का नाम क्या है ? कर्मचंद गुगलानी, , 5. मोहन राकेश ने 1962 में कौनसी पत्रिका का सम्पादन कार्य किया ? 'सारिका', , 6. मोहन राकेश का निधन कब हुआ ? 3 दिसम्बर, 1972, , 7. रचनाएँ-- उपन्यास - अँधेर बंद कमरे, अंतराल, न आने वाला कल।, नाटक- आषाढ़ का एक दिन, लहरों के राजहंस, आधे-अधुरे, पैर तले की जमीन (अधूरा), अनूदित नाटक- शाकुंतल, मृच्दकटिक, एकांकी- अंडे के छिलके, अन्य एकांकी तथा बीज नाटक, रात बीतने तक अथा अन्य ध्वनि नाटक।, , कहानी संग्रह- एक और जिंदगी (1961), पहचान, वारिस, एक घटना।
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निबन्ध- बकलम खुद, परिवेश, यात्रावृत्त- आखिरी चट्टान तक, बालोपयोगी कहानी संग्रह- बिना हाड़-मांस के आदिमी, तथा मोहन राकेश रचनावली 13 खंड, 8. पुरस्कार- संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, नेहरू फेलोशिप,, 9. मोहन राकेश फिल्म सेंसर बोर्ड के सदस्य भी रहे ।, 10. 'मलबे का मालिक' कहानी में कौनसी स्थितियों का वर्णन किया गया है ? मोहभंग, , 11. मलबे का मालिक' कहानी विभाजन के उपरांत कितने वर्षों के मानसिक परिवर्तन को व्यक्त करती है ?, साढ़े सात, , 12. 'मलबे का मालिक' यह कहानी मनुष्य को कौनसा उपदेश देती है ? मानवता, , 13. 'मलबे का मालिक' कहानी का कथानायक कौन है ? गनी मियाँ, , 14. साढ़े सात साल के बाद वे लोग लाहौर से हॉकी मैच देखने कहाँ आये थें ? अमृतसर, 15. गनी मियाँ के बेटे का नाम क्या है ? 'चिराग', , 15. 'चिराग' की बीवी का नाम कया है ? 'जुबेदा', , 16. 'चिराग-जुबेदा' का रिश्ता क्या है ? पती-पत्नी, , 17. चिराग और जुबेदा की दोनों बेटियों के नाम क्या है ? किश्वर ओर सुल्ताना, , 18. गनी मियाँ का सबसे अधिक विश्वास किस पर था ? 'रक््खे पहलवान', , 19. गनी मियाँ के परिवार को कौन मारता है ? 'रक्खे पहलवान', , 20 'रक्खे पहलवान' किस पर अपनी जागीर समझता था ? मलबे पर (टिप-यह वही मलबा है, जो दंगों के, समय “गनी मियाँ” के मकान का हुआ था। जिसका प्रमुख कारण रक्खा पहलवान ही था।), , , , 21. “जो होना था, हो गया रक्खिआ ! उसे अब कोई लौटा थोड़े ही सकता है! खुदा नेक की नेकी बना, रखें और बद की बदी माफ करें!” यह कथन किस का है ? गनी मियाँ, , 22. 'रक्खे पहलवान' को मलबे से कौन हटा देता है ? एक कुत्ता, , 23. 'मलबे का मालीक' कहानी में मोहभंग किसका होता है ? गनी मिया और रक्खा पहलवाना